
हर साल की तरह इस साल भी 30 जनवरी को लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह 11 बजे सिविल डिफेंस की टीम ने मैनुअल सायरन बजाकर पूरे चौराहे को दो मिनट के लिए रोक दिया। ट्रैफिक सिग्नल बंद हुए और हमेशा शोर-शराबे से भरा हजरतगंज अचानक शांत हो गया।
वाहन चालक, राहगीर और दुकानदार सभी बने श्रद्धांजलि देने वाले
सायरन की आवाज़ के साथ ही सभी वाहन चालकों, राहगीरों और दुकानदारों ने अपने स्थान पर रुककर राष्ट्रपिता को याद किया। दो मिनट का मौन न केवल अनुशासन का प्रतीक था, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों और बलिदान की याद दिलाने का संदेश भी देता है।
मैनुअल सायरन: परंपरा और अनुशासन का प्रतीक
सिविल डिफेंस के डिविजनल वार्डन के अनुसार, इस मैनुअल सायरन में हैंडिल घुमाते ही तेज आवाज़ निकलती है। आधुनिक डिजिटल दुनिया में भी इस हैंड-ऑपरेटेड सायरन का इस्तेमाल परंपरा और अनुशासन की याद दिलाने के लिए किया जाता है। कार्यक्रम के बाद सायरन को सुरक्षित रूप से सिविल डिफेंस कार्यालय में रखा जाता है।

यातायात फिर सामान्य, हजरतगंज की चहल-पहल लौटी
दो मिनट का मौन खत्म होते ही ट्रैफिक सामान्य हुआ और हजरतगंज चौराहे की रोज़मर्रा की चहल-पहल लौट आई। यह छोटा सा लेकिन असरदार कार्यक्रम नई पीढ़ी को गांधीजी के आदर्श और अनुशासन का पाठ पढ़ाने में मदद करता है।
